Sunday, 5 November 2017

झंझारपुर को प्रशासनिक जिला का दर्ज़ा प्रदान करने के सम्बन्ध में / JHANJHARPUR

झंझारपुर को मधुबनी से अलग एक नई पहचान देना एवं जिला के रूप में प्रशासनिक दर्ज़ा प्रदान करना

 तभी संभव हों सकता है , जब इस मुद्दे पर सर्वदलीय सहमति बने .


   भारतीय जनता पार्टी झंझारपुर को जिला के रूप में पहले ही सांगठनिक मान्यता प्रदान कर चुकी है .


   कुछ राजनितिक दलों ने झंझारपुर को जिला का प्रशसनिक दर्ज़ा देने के मुद्दों पर अनर्गल प्रलाप कर
   इसे कुछ दिनों के लिए इंतज़ार की विषय-वस्तु अवश्य बना दिया है .

  सकारात्मक एवं ईमानदार प्रयास अगर इस क्षेत्र से जुड़े सक्रिय तत्वों द्वारा किया जाये तो अगले छह महीने
  के अंदर झंझारपुर , बिहार का एक नया प्रशासनिक जिला का दर्ज़ा अवश्य प्राप्त कर लेगा .

                                           स्थापना से सम्बंधित व्यय आड़े नहीं आएगी

सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण जिला के रूप में एक प्रशासनिक संगठन की आवश्यकता मैं भी महसूस करता हूँ , एवं हमारी पार्टी ने राज्य हित में , राष्ट्र हित में एवं स्थानीय समाज हित में झंझारपुर को सांगठनिक जिला का दर्जा बहुत पहले ही दे चुकी है .

  भारतीय जनता पार्टी समाज एवं राष्ट्र , दोनों मुद्दे पर दूरदर्शी सोच रखती है , हमने वह सब कुछ दशकों
  पहले किया , जिसकी मांग हमे पानी पी-पी कर कोसने वाले आज कर रहे है , वह भी राजनितिक ,सामाजिक एवं क्षेत्रीय विद्वेष की बीज बोने एवं तदनुरूप उगे फसल काटने एवं राजनितिक रूप से भुनाने के लिए .

  मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ , भारतीय जनता पार्टी किसी की पारिवारिक पार्टी नहीं , यह समाज की पार्टी है , भारतीय जनता पार्टी प्रत्येक व्यक्ति की पार्टी है जो राष्ट्रहित एवं समाजहित में सोचते हैं . 

Monday, 9 October 2017

AVINASH JHA SPEAKS


                                                

      AVINASH JHA SPEAKS

     PUBLIC RELATION OFFICE OF AVINASH JHA ( BJP) 

     AT:- ARARIA SANGRAM , JHANJHARPUR , DIST- MADHUBANI ( BIHAR)


AVINASH JHA 

            
बिहार के विकास पर , प्रदेश के निवासियों की शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के उचित निराकरण एवं मूलभूत मानव लक्ष्यों की पूर्ति हेतु भाजपा के अगुवाई में चल रही केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ( एन. डी . ए ) सरकार निरंतर सक्रिय एवं कार्यरत है .

 केंद्रीय विद्यालय में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति , नये केंद्रीय विद्यालय की स्थापना , प्रदेश में एम्स की तरह का एक अति विशिष्ट अस्पताल की स्थापना , सैकड़ो किलोमीटर नये नेशनल हाईवे की स्वीकृति , रेल लाइन के आमान परिवर्तन समेत कई ऐसे कार्य है जो प्रदेश वासिओं को हर्षित एवं गर्वान्वित करेगी .

उज्ज्वला योजना के तहत घरेलु रसोई गैस कनेक्शन प्राप्त कर कई घरों की महिलाओं की रसोई में बिताये जाने वाले समय एवं दशा दोनों बदल रही है .

घर - घर शौचालय अभियान के द्वारा जागरूक गरीब एवं अमीर दोनों ही आर्थिक दशा वाले परिवारों को  राहत एवं स्वालम्बी होने का भान कराता है .

 कंप्यूटर साक्षरता अभियान के तहत प्रशिक्षण लेकर प्रदेश के अधिसंख्य जागरूक युवा एवं विद्यार्थीगण अपने भविष्य को सवांरने में नित्य क्रियाशील है , पढाई से लेकर व्यापार एवं अन्य सभी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए कंप्यूटर एवं डिजिटल माध्यम का सहारा ले रहे हैं , गुणवत्ता एवं विषय-वस्तु  दोनों की समझ बढ़ रही है , उन्हें कोई ठग या बरगला नहीं सकता .

कई छोटे एवं बड़े उद्योग धंधे , वाणिज्य एवं व्यवसाय का ठोस प्रारम्भ हुआ है , कुछ प्रक्रियाधीन है .

रोज़गार सृजन के कई प्रयास लगातार चल रहे हैं जिससे जरूरतमंद एवं दक्ष युवकों एवं युवतियों को जीवन-निर्वहन की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके .

संस्कार , संस्कृति एवं अनुशासन तो घर एवं परिवार से होती है , तदनुरूप समाज , टोला , गाँव एवं आबादी की बिभिन्न सांगठनिक इकाइयों का गठन होता है . थोड़ी आवश्यकता अपने देश की प्राचीन सभ्यता , संस्कृति , कला, एवं अन्य अनुकरणशील रचनाओं पर देने की है , जिससे वर्तमान युवा की बात तो दूर , व्यस्क भी दूरी बना कर रखे हुए हैं .

हमारा देश कभी विश्व गुरू था , आज हम नकलची होते जा रहे हैं एवं पाश्चात्य सभ्यताओं एवं संस्कृतियों के अनुकरण में
स्व हित का भी चिंतन नहीं कर रहे , समाज एवं राष्ट्रहित की बात तो दूर है . अंधाधुंध विदेशी सामग्रियों का आयात,
दैनिक आवश्यकताओं में प्रयोग एवं विदेशी सामग्रियों के व्यवहार को स्टेटस सिंबल बनाना मानसिक विपन्नता का घोतक
 नहीं तो और क्या है .

हमारी खादी प्रायः लुप्त हो रही है . किसानो के खेती परंपरा से कई महत्ववाले फसल लुप्त हो गयी ,पैकेट बंद दूध खाने
 को स्टेटस सिंबल बनने से मवेशी घरों से गाय भी गायब हो गए.

कई त्योहार एवं अनुष्ठान तो मुझ जैसे कम उम्र वाले व्यक्ति के लिए भी इतिहास की बिषय वस्तु हो गयी .

 भारतीयता एवं भारतीय होने की कद्र थी कभी विश्व के सामजिक पटल पर , यहाँ की प्रत्येक परंपरा एवं अनुष्ठान में
  वैज्ञानिकता थी , मानव जीवन हेतु दशा एवं दिशा वर्धक थी .

एक दुसरे को दिखाने यानी दिखावा में बाज़ारवाद का अभ्युदय हुआ , पश्चमिकरण एवं विदेशी वस्तु के उपभोग एवं उपयोग
की आंधी चली , अपने देश की कई अमूल्य रचना , कृति , एवं संघटन नष्ट हो गए . आज विदेशी खाद्य सामग्री एवं पेय लगभग सभी भारतीयों के भोजन प्रबंधन में अपनी जगह बना चुका है .

कामचोरी एवं फैशन की भी हद होती है , लोग प्लास्टिक चावल खा सकते हैं , पोस्टर कलर से बना दूध पी सकते है ,
 लेकिन स्वास्थ्य आहार के लिए कृषि कार्य नहीं कर सकते . स्टेटस सिंबल नीचा होता है कृषि कार्य करने वालों का ,
 ऐसी बात सच के रूप में माना जा रहा है आज के वर्तमान समाज में . अत्यधिक बाज़ारवाद को प्रश्रय देने के बाद 
  क्या होता है हम इस बात की भी अनुसंधान कर रिपोर्ट बनाने के दौर में चल रहे है .

भड़कीले रैपर वाले मशाले , चावल , दाल , मिर्च एवं धनिये की पाउडर एवं ना जाने क्या क्या .

आज मनुष्य केवल खाने के लिए ही जी रहा है यह प्रत्येक घर में परोसे जाने वाले भोजन एवं भोजन विन्यासो से
 पता चल जाता है . 
कुल जमा 100 के बदले 400 का खपत कैसे किया जा सकता है .

लोगों ने सही गलत खाकर एवं स्टेटस सिंबल अपनाकर सभी छोटे बड़े अस्पतालों कोडंपिंग केंद्र ( मानव कूड़ेदान )
 बना दिया है .

शुरुवात बिहार राज्य के विकास में प्रयासों से होते हुए हम मानव के कार्य , कर्त्तव्य , एवं मनोदशा
तक चले जाते रहे जिसमे  क्षेत्र का बंधन नहीं होकर सम्पूर्ण हिन्दुस्तान को समाहित कर लिया गया .

सभी व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य एवं अंतिम लक्ष्य एक ही है एवं सभी उसे पाने में सफल हो जाते है , 
सर्वशक्तिमान ईश्वर किसी को भी परम उद्देश्य एवं परम लक्ष्य की प्राप्ति के इम्तिहान में असफल नहीं करते .
 लेकिन ईश्वर निर्मित इंसान आज अपनी मानसिक उद्वेग एवं विचलन की तरंग में प्रकृति की सभी नैसर्गिकता
 को ध्वस्त कर चुका है .

उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों से कई कलाकृतियां बनाने की परंपरा कमोबेश हिन्दुस्तान के सभी राज्यों में थी .
 गीत - संगीत , न्याय , मीमांसा ,दर्शन , कला , विज्ञानं , चिकित्सा समेत सभी पहुलओं पर हमारी स्थिति निम्न 
 स्तर को छूने की स्थिति में है .

   विद्व्ता बाज़ार में बिकने लगी है , पैसे देकर परीक्षाफल अनुकूल एवं प्रशंसनीय किया जाने लगा है , 
       क्या ऐसी स्थिति किसी देशभक्त या राष्ट्रहित में सोचने वाले व्यक्ति का निर्माण कर सकती है .

     घूसखोरी क्या देशद्रोह नहीं है ? कौन ऐसा समाज बचा है जो घूसखोरों के आगे नतमष्तक नहीं है .

   लोग फक्र से अपने बच्चों या अन्य सम्बन्धियों के घूसखोर होने एवं भारी मात्रा में बाहरी आमदनी होने की बात कह
   इतराते है , दिखाने की कोशिस होती है की बाज़ारवाद के इस दौर में सामाजिक अग्रणी की उनकी भूमिका है .

   देश एवं राज्यों की कितनी भी समस्याओं का निराकरण क्यों नहीं कर लिया जाए , वे निरंतर बने रहेंगे , 
    आबादी बढ़ रही है . वैसे भी भौतिक विकास सतत एवं निरंतर चलते रहने वाली प्रक्रिया है .

  बौद्धिक विकास सम्बंधित मुद्दों पर कितनी आवाज़ को जोड़ पाने की क्षमता रखता है अपना वर्तमान समाज ?

   वार्ड सदस्य के चुनाव से लेकर संसद चुनाव तक आपको अपने समाज में कई ऐसे समूह मिल जायेगे जो 100 से
  1000 रुपये तक लेते हैं वोट देने के लिए , उम्मीदवार कोई भी रहे - वोट के बदले नोट ही चलेगी . 
   वोट बेच सकते हैं तो देश बेचने में वैसे आदमी को कितनी देर लगेगी ?

   समय अभी जाति , बिरादरी , धर्म एवं पंथ के तरफ सोचने की नहीं , भारतीय सनातन परंपरा के तरफ , 
   यहाँ की प्रकृति एवं भौगोलिक संरचना के तरफ अनुसंधानात्मक ढंग से सोचने की है . 

   जलवायु परिवर्तन स्पष्ट तौर पर अनुभव योग्य है , वृक्षों की कटाई , प्रदूषण ही अब मुद्दे नहीं हैं ,
   कई ऐसे सूक्ष्म तत्व सक्रिय होकर मानव अस्तित्व के लिए खतरा हो चुकी है जिसे दवा की गोली से
   नहीं बल्कि मानवीय विवेक एवं आत्मचिंतन से दूर करने का प्रयत्न किया जा सकता है.

   बिजली , सड़क , रेल , पुल को मुख्य मुद्दा नहीं बनाकर संस्कार सृजन , चरित्र निर्माण एवं अनुशसित ,
   शिक्षित , कला , संस्कृति , परंपरा निपुण समाज एवं वैसे समाज के लिए आवश्यक सभी वैकल्पिक ढांचा 
   के निर्माण को मुद्दा बनाने की आंतरिक शक्ति समाज के सभी सदस्यों को अपने अंतरात्मा एवं अंतर्मन 
    में विकसित करनी होगी .

  आत्म-संयमित एवं विवेकशील होने की लक्ष्य को आज प्राप्त कर ले अपना भारतीय समाज ,
  अपना देश पुनः जगतगुरु के सम्मानित ओहदे को प्राप्त कर लेगा .

National Digital Literacy Mission NDLM

                                      www.avinashjhaspeaks.blogspot.com


                               सार्थक पहल की पहली सिद्धि 

                           अविनाश झा  (राजा बाबू )

                                                        



              तकनीकी शिक्षण - प्रशिक्षण वर्तमान युग की मूलभूत आवश्यकता है एवं 
                                        कंप्यूटर का ज्ञान उसकी प्रथम सोपान .

            बौद्धिक विकास हेतु कंप्यूटर - इंटरनेट की महत्ता को नकारना संभव नहीं है .


           कंप्यूटर सम्बन्धी जानकारी सभी आयु वर्ग के लोगों की दैनिक आवश्यकताओं
                                            में आवश्यक दखल रखती है .

           सभी पहलुओं को चर्चा में लाना संभव नहीं हो सकता लेकिन एक सराहनीय
        प्रयास मधुबनी जिला के अड़रिया - संग्राम गाँव में आज मूर्त रूप लेते नज़र आयी .

             यह संभव हो सका है इंस्टिट्यूट फॉर कंप्यूटर टेक्नोलॉजी , अड़रिया संग्राम


         ( INSTITUTE FOR COMPUTER TECHNOLOGY , ARARIA SANGRAM )

             में जहाँ आज 60 छात्र - छात्राओं को बिहार कौशल विकास योजना के अंतर्गत 
          संचालित कंप्यूटर विज्ञान की विभिन्न पाठ्यक्रम के सफल प्रशिक्षण एवं परीक्षाफल
                             प्रकाशनोपरांत प्रमाण -पत्र का वितरण किया गया .

                ग्रामीण विद्यार्थियों ने अनुमान से ऊँचे कई आयाम गढ़े एवं इस संस्था 

         की प्रशस्ति में कुछ सितारे जोड़े .कुछ छात्रों ने 90% अंक लाकर प्रदेश स्तर
                            पर अपना एवं अपने संस्था का नाम बुलंद किया .

            प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम में स्थानीय सांसद श्री वीरेन्द्र कुमार चौधरीजी ,

                 सामाजिक एवं राजनितिक कार्यकर्ता एवं आई .आई .टी खड़गपुर के 
           पूर्ववर्ती छात्र रह चुके डॉ. सुनील झा , प्रख्यात दन्त चिकित्सक डॉ राम रतन , 
      वरीय सामाजिक एवं राजनितिक चिंतक श्री अजय झा , यशश्वी शिक्षक श्री परमेश्वर जी 
     उपस्थित थे वहीं संस्था की तरफ से निदेशक अजितेश झा , अभिमन्यु झा , शेखर सुमन
                                                  लगातार सक्रीय दिखे .


                   कुल मिलकर , यह एक शानदार शुरुआत थी ग्रामीण परिवेश के छात्रों का .



                        कई ऐसे छात्र - छात्राएं भी दिखे जो नामांकन की प्रक्रिया जानने-समझने

                                    को उत्सुक थे , अपनी बारी आने का इंतज़ार कर रहे थे .


                     स्थानीय सांसद श्री वीरेन्द्र कुमार चौधरी जी विद्यार्थियों की रुझान से 

                  प्रफ्फुलित नज़र आये एवं इस तरह की पाठ्यक्रम को समयानुसार काफी
                   उपयोगी बताते हुए , छात्रों को पूर्ण मनोयोग से अध्यन एवं कौशल वर्धन
                                            में जुट जाने की अपील भी किया .



  
INSTITUTE FOR COMPUTER TECHNOLOGY , ARARIA SANGRAM.

INSTITUTE FOR COMPUTER TECHNOLOGY , ARARIA SANGRAM.


INSTITUTE FOR COMPUTER TECHNOLOGY , ARARIA SANGRAM.




   Member of parliament sri Birendra kumar choudhary
with socio-political analyst Sri Ajay jha .

Local MP ( Loksabha ) sri Birendra kumar choudhary jee
awarding the degree to successful candidate.
All the dignitaries and students At Institute for computer Technology , Araria sangram.

Wednesday, 28 December 2016

Atal Bihari Vajpayee /

                            
                                                        

                       हमारे अटलजी  -  हमारा अभिमान 

                                                          Date- 26-12-2017
                                                         
प्रातः स्मरणीय , भारतीय राजनीति के ऋषिराज , असाधारण व्यक्तित्व ,दुर्लभ भाव - भंगिमा एवं सौम्य
हृदयपति परम श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्मदिवस प्रत्येक आम व खास नागरिक के लिए
अहम वो खास है .

राष्ट्र निर्माँण एवं राष्ट्र के निवासियों के चरित्र निर्माँण हेतु समर्पित इस व्यक्तित्व के जन्म दिवस को किसी 
राष्ट्रीय पर्व से कमतर नहीं आंका जा सकता है .

पिछले तीन दिनों से मन को एकाग्र नहीं कर पा रहा था कि अटल जी के सँदर्भ में क्या लिखा जाये .

अटल जी के विषय में लिखना या वक्तव्य देना कोई मामूली कार्य नहीं है .गत वर्ष साथियों - समर्थको 
के साथ अटल बिहारी वाजपेयी जन्मोत्सव सप्ताह मनाया था एवं सुदूर ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्र मे विकास 
की संभावना तलाशने के साथ ही श्रद्धेय वाजपेयी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्त्व से जन मानस को अवगत 
कराया था .

आज़ सुबह से अटल ज़ी के जन्म दिवस को संदर्भित करते संवाद विभिन्न संचार स्रोंतों पर प्रमुखता बनाये 
हुई है जो अभी देर रात तक चल रही है .

चले भी क्यों नहीं !

संसद के संत , राजनीति के ऋषिराज एवं एक जीवित किंवदंती , दिव्य निर्मल चरित्र के स्वामी से सम्बद्धता
 जो रखती है !

इस ऐतिहासिक क्षण को एक राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाने की रूपरेखा आप सभी हितचिंतकों को तय करनी
 है ताकि अटल जी के जीवन - संघर्ष से प्रेरित होकर हमारे समाज एवं राष्ट्र की अगली पीढ़ी का मजबूत
 चारित्रिक गठन संभव एवं साकार हो सके .

आप सभी हितचिंतक , स्वजन एवं कुटुंब परिवारोँ को भारतीय राजनीति के अद्भुत राष्ट्रपर्व - अटल जन्मोत्सव
की सादर शुभकामनाएँ .
                                                                                                                 आपका
                                                                                                             अविनाश झा
                                                                                                              26-12-2017


Monday, 14 November 2016

माननीय श्री प्रधानमंत्री महोदय
श्रद्धा एवं विनम्रता संग सादर नमस्कार

सन्दर्भ - बैठा रखी है हमने, तेरी सु-मूर्ति मन में। फैला के हम रहेंगे, तेरा सु-यश भुवन में।।

आदरणीय मार्गदर्शक ,
भारत प्राचीन काल से शौर्य, पराक्रम , विद्वता , परोपकार , दान , तप , पुण्यकर्म ,न्याय , मीमांशा ,सहित साधना की भूमि रही है l
भारत एवं नेपाल के सीमाक्षेत्र पर अवस्थित मिथिला भू-भाग का विश्व-सभ्यता पर एक अमीट छाप रहा है , यहाँ के लोगों ने विद्वता एवं तप के बल पर ऊंचाइयों को प्राप्त किया एवं प्रतिष्ठित हुए l
 माननीय मार्गदर्शक , मिथिला में भी शौर्य का प्रसार आधुनिक समय में होता दिख रहा है जिसके पोषण की अति आवश्यकता है l इस भू-भाग के लोग शांत प्रवृति , सहनशील ,कर्तव्यनिष्ठ एवं सहज हैं l
अवलोकन एवं विश्लेषण का नज़रिया सभी व्यक्ति की अलग-अलग हो सकती है l
 माननीय प्रधान महोदय , मिथिला भू-भाग के युवाओं का सैन्य सेवाओं में शामिल होकर राष्ट्रभक्ति के जज्बे मुझे भी हर्षित करती है एवं फक्र होता है हम भी अपनी मातृभूमि के कण-कण को सुरक्षित एवं संवर्धित रखने को अपना कर्त्तव्य उस गिलहरी की भांति कर रहे हैं जिसने श्री राम के प्रति अपना कर्तव्य का पालन पूर्ण ईमानदारी से किया एवं प्रासांगिकता तथा अमरत्व को प्राप्त हुआ l
माननीय प्रधान महोदय , दिनांक 09 नवम्बर 2016 को पाकिस्तानी गोलीबारी में दुश्मनो को मुहतोड़ जवाब देने के क्रम में शहादत को गले लगाने वाले मिथिलापुत्र एवं राष्ट्रमाता के बहादूर सिपाही , बी एस एफ जवान विकास कुमार मिश्र का सन्दर्भ करें l
अमर शहीद विकास कुमार मिश्र , मधुबनी ज़िला के झंझारपुर अंचलन्तर्गत रैयाम गांव के निवासी हैं , पारिवारिक पृष्ठभूमि गरीबी के दंश झेलते हुए विकासवादी कल्पनाओं से चल रही थी , फूस का एक मात्र घर और उसमें शहीद के पितृविहीन परिवार के चार भाई - तीन भाभी एवं भतीजा - भतीजी l
  दो बहनो की शादी में कुछ कठ्ठों की कुल वसीयत का अधिकांश हिस्सा बिक चूका है l  ह्रदय की गंभीर बीमारी से ग्रसित शहीद की माँ तो विपदाओं का भयानक काला पहाड़ अपने समक्ष खड़ा पाया एवं अभी भी चेतना शून्य एवं किंकर्तव्यमूढ़ दशा में है l मैंने निर्देशानुसार शहीद के गाँव एवं घर जाकर सभी पहलुओं को काफी बारीकी से अध्यन किया एवं  पारिवारिक विपदा से जूझ रहे शहीद के परिवारजनों को सम्बल प्रदान करने हेतु प्रतिदिन अधिक से अधिक समय शहीद के आँगन में व्यतीत किया l
माननीय प्रधान महोदय ,राष्ट्रमाता एवं जन्म तथा पालनपोषण करने वाली माता, दोनों के लिए शहीद का बलिदान फक्र एवं गर्वान्वित करने वाले पल अवश्य लाते हैं लेकिन मानव की स्मृति बड़ी ही अल्प होती है एवं शहीदों का बलिदान एवं त्याग मानव प्रजाति के जेहन से विस्मृत हो जाता है एवं शहीदों के परिवार का सुधि  लेने वाला कोई नहीं होता l
 शहीद विकास कुमार मिश्र ने अल्पायु एवं अविवाहित अवस्था में शहादत को प्राप्त किया है , उन्होंने अपने जीवन को सार्थक करने एवं प्रचंड यश अर्जित करने के उपरान्त ही अंतिम पड़ाव की ओर प्रस्थान किया ,उस शहीद को अजर-अमरत्व प्रदान करने हेतु हमें भी विवेकशील होना होगा एवं निर्णय लेने हेतु भावी पहलुओं को भी विचार करना होगा जिससे अत्यधिक मात्रा में युवा राष्ट्रसेवा को उद्धत हो सकें l
माननीय प्रधान महोदय , एक कलाकार गायक जब अपनी कृति के अमरत्व की इच्छा रखता है और - " मेरे गीत अमर कर दो " जैसे अभिव्यक्ति देता है तो एक वीर वंकुरा भारतमाता के पुत्र की क्या इच्छा रहती  होगी l
 महोदय भारत की , खासकर मिथिला की परंपरा रही है की पुत्र या पुत्री किसी व्यक्ति के नाम को रेकॉर्डों एवं संचिकाओं में जीवित रखते हैं l  हमारे मिथिलापुत्र अमरशहीद विकास कुमार मिश्र के नामों को चिर अमरत्व प्रदान करने की जिम्मेदारी प्रथमतया मेरी है एवं सभी विसंगतियों को दूर कर उसपर सहमति प्रदान करना आपका कर्त्तव्य है ताकि युवावर्ग को हम हतोत्साहित होने से रोक सकें l
 हाजीपुर मंडल के लोहना रोड स्टेशन का नामांकरण बी एस एफ शहीद विकास कुमार मिश्र के नाम पर किया जाये तो उनका नाम राष्ट्रीय स्तर पर जीवंत रहेगा एवं हमारे - आपके बाद भी रेलवे विभाग का कोई कर्मचारी - अधिकारी शहीद का नाम लेते हुए जब उनके गाँव में उनके जयंती या शहादत दिवस पर औपचारिकता को पूरा करने के उद्देश्य से पहुंचेगा तो उस शहीद की आत्मा अवश्य इठला - इठला कर अपने जीवन की सार्थकता एवं देशप्रेम से , आने वाली कई मानव पीढ़ियों को हर्षित करेगी , वीरों को सरसायेगी l
 माननीय प्रधान महोदय , मैंने मराठों का शौर्य , वनांचल की निश्छलता ,एवं मानवीय संवेदनाओं एवं वृति कर्मों की गहन प्रायोगिक दीक्षा विदर्भ भू-भाग के चंद्रपुर में 15 वर्ष रहकर लिया एवं संघ शक्ति एवं सुकर्म वृत्ति पर अनुसंधानरत हूँ एवं सौभाग्य है की हमारे सरसंघचालक के गाँव होने का गौरव भी चंद्रपुर को सौभाग्यवश नहीं अपितु कर्म एवं कर्मठता के बदौलत ही मिला l
 प्रधान महोदय , एक सैनिक की अपने नाम , यश ,एवं देश के अमरत्व की क्या आकांछा होती होगी इस सन्दर्भ में आपसे क्या वर्णन करना , आपकी अनुशासित एवं संयमित जीवनशैली क्या किसी सैनिक से कम है l
 महोदय , मिथिला में लोगों को सामने वाले से आकांक्षाएं अनंत होती है , वर्तमान में भ्रामकताएं भी आयी है एवं क्रियाशील लोगों को विभ्भिन्न हथकंडों से हाशिया पर डालने की प्रथा का सबसे जीवंत एवं मौलिक स्वरुप मिथिला भू-भाग में ही अनुभव करने को मिलेगा  ,संवाद  प्रेषण में ईमानदारी होनी चाहिए ,अतः जिक्र आवश्यक था।
माननीय प्रधान महोदय ,अमर शहीद  विकास कुमार मिश्र को अमरत्व प्रदान करने के मेरे सन्दर्भ को  रेल मंत्रालय , भारत सरकार एवं सम्बंधित विभाग को जांचोपरांत क्रियान्वयन हेतु निर्देशित करेंगे ऐसी आकांक्षाओं एवं आपके नेतृत्व में शस्य श्यामलां मातरं की वैभव , शौर्य , संस्कृति , समृद्धि को पुनर्स्थापित करने के महायज्ञ  एवं महाप्रण का लगातार बिना किसी विघ्न-बाधा के महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहूँ ऐसी कामनाओं के संग

अर्पित सु-मन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
पूजा या पन्थ कुछ हो, मानव हर-एक नर है। हैं भारतीय हम सब, भारत हमारा घर है।।

 
आपका सदैव ,

अविनाश झा ( राजा बाबु )

Monday, 19 September 2016

Tearful tributes are paid to the martyred jawans who made the supreme sacrifice in Sunday's Uri terror attack.





Tearful tributes are paid to the martyred jawans who made the supreme sacrifice in Sunday's Uri terror attack.
Names of Jawans martyred in Uri:
1. Subedar Karnail Singh (J&K)
2. Havildar Ravi Paul (J&K)
3. Sepoy Rakesh Singh (Bihar)
4. Sepoy Javra Munda (Jharkhand)
5. Sepoy Naiman Kujur (Jharkhand)
6. Sepoy Uike Janrao (Maharashtra)
7. Havildar NS Rawat (Rajasthan)
8. Sepoy Ganesh Shankar (U.P.)
9. Naik SK Vidarthi (Bihar)
10. Sepoy Biswajit Ghorai (West Bengal)
11. Lance Naik G Shankar (Maharashtra)
12.Sep G Dalai (West Bengal)
13. Lance Naik RK Yadav (U.P.)
14. Sepoy Harinder Yadav (U.P.)
15. Sepoy TS Somnath (Maharashtra)
16. Havildar Ashok Kumar Singh (Bihar)
17. Sepoy Rajesh kr Singh (U.P.)
18. Sepoy K Vikas Janardhan (Maharashtra)

               Avinash jha on his initiative for the development of C.M. Law College , Darbhanga